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Saturday, September 19, 2009

यादें ...

" दोस्तों मेरे १० साल के बड़े दोस्त ने मुझे कुछ इस तरह से याद किया था ,जो बात मेल के जरिये मुझे उसने कही थी ,ये जो कविता है वो उसी मेल का एक हिशा है .....आई ये मेरे बड़े से नन्हे मुन्हे दोस्त के कलम का जादू देखे ....." गोबर के अंदर फंस गया सिकंदर " पोस्ट उसे बेहद पसंद आई थी ... और उसने मुझे ये बात कही जो आज "यादें" के रूप में आपके सामने रख रहा हु मेरे लिए कलम उठाने वाले मेरे १० साल के दोस्त का नाम है ....."सागर "
हम तुम ,

हर पल मिलेंगे ,


आज मिले ,


कल मिलेंगे ,


मानों हर.... पल मिलेंगे ,


पल पल मिलते मिलेंगे ,


बिछडे कभी ,फ़िर भी मिलेंगे ,


गर ना मिल सके तो .....


यादों की गहराई में मिलेंगे "



----- मेरे दोस्त १० साल के " सागर " की रचना


13 comments:

Mithilesh dubey said...

कया बात है। गजब की भावना है भाई बहुत खुब। बहुत-बहुत बधाई इस लाजवाब रचना के लिए........

Suman said...

हम तुम ,

हर पल मिलेंगे ,

आज मिले ,

कल मिलेंगे ,

मानों हर.... पल मिलेंगे ,

पल पल मिलते मिलेंगे ,

बिछडे कभी ,फ़िर भी मिलेंगे ,

गर ना मिल सके तो ......

यादों की गहराई में मिलेंगे "nice

Kusum Thakur said...

बहुत ही अच्छी रचना है . "सागर "को
बहुत बहुत बधाई.

Nirmla Kapila said...

bahut sundar racanaa hai is bacce kee bahut bahut badhai aur aasheervaad

"MIRACLE" said...

bahut hi sundar abhivyakti....subhkamnayein

लता 'हया' said...

nanhe sagar mein bahut gahrai hai.god bless him.

SACCHAI said...

" aap sabhi ka mai tahe dil aabhar vyakt karta hu ki aap sabne mere nanhe dost ka hosala badhaya hai ....."

" aapki subhkamnaye mere dost ko mano koi tonik ki tarha kaam aayegi ...dhanywad "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

http://hindimasti4u.blogspot.com

Harkirat Haqeer said...

Sagar ji bahut achha prayas hai ....likhte rahein .....!!

Babli said...

इस शानदार, लाजवाब और बेहतरीन रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

महफूज़ अली said...

is shandaar rachna ke liye bahut bahut badhai........

sujata said...

Itni gahrai bhari rachna ke liyew sagar ki gahrai chahiye...SAGAR ke maata-pita ne bilkul sahi rakha hai unka(anjaane me hi sahi...naam mein hi sab kuch rakha hai saga ke...)

Sagar ko meri or se bahut badhaiyaan. Ummed hai is gahrai me se phir koi rachna phootegi.

Nirbhay Jain said...

काफी अच्छी रचना है अनुप्रास अलंकार का अच्छा प्रयोग किया है !
आगे भी जारी रखे इसी शुभकामना के साथ ! बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

वाह....
ये तो बहुत सजी-सँवरी रचना है।
बधाई!

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