" दोस्तों मेरे १० साल के बड़े दोस्त ने मुझे कुछ इस तरह से याद किया था ,जो बात मेल के जरिये मुझे उसने कही थी ,ये जो कविता है वो उसी मेल का एक हिशा है .....आई ये मेरे बड़े से नन्हे मुन्हे दोस्त के कलम का जादू देखे ....." गोबर के अंदर फंस गया सिकंदर " पोस्ट उसे बेहद पसंद आई थी ... और उसने मुझे ये बात कही जो आज "यादें" के रूप में आपके सामने रख रहा हु मेरे लिए कलम उठाने वाले मेरे १० साल के दोस्त का नाम है ....."सागर " हम तुम ,
हर पल मिलेंगे ,
आज मिले ,
कल मिलेंगे ,
मानों हर.... पल मिलेंगे ,
पल पल मिलते मिलेंगे ,
बिछडे कभी ,फ़िर भी मिलेंगे ,
गर ना मिल सके तो .....
यादों की गहराई में मिलेंगे "
----- मेरे दोस्त १० साल के " सागर " की रचना

